Baba Balak Nath Chalisa is one of the most powerful devotional hymns dedicated to Baba Balak Nath Ji. It is believed that regular recitation of the Baba Balak Nath Chalisa brings peace, courage, protection, and removes fear and negativity from life.
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📜 बाबा बालक नाथ चालीसा – Baba Balak Nath Chalisa in Hindi
प्रथम गणेश मनाए के सतगुरु को करूँ प्रणाम
गौरी मात महेश का ले सुखकारी नाम
सिद्ध योगी और ज्ञानी जन सरस्वती माँ सुख रास
बाबा बालक नाथ जी मन में करो निवास
जय बालक नाथ दया के सागर जय जय भक्ति ज्ञान उजागर
शांत छवि मूर्ति अति प्यारी अंग विभूति, दिगंबर धारी
हाथ में झोली, चिमटा विराजे बाल सुनहरी छवि अति साजे
गौ विप्रन के तुम रखवारे दुष्ट निकंदन, उमा दुलारे
तीन लोक की बात को जानो तीनों काल क्षण में पहचानो
तेरो नाम है जग में प्यारा तीनों ताप निवारण हारा
नाम तुम्हारा जग में सच्चा सुमिरत भगत, भूत-पिशाचा
राक्षस, यक्ष, योगिनी भागे तुम्हरे चिंतन भय से लागे
विप्र, विष्णु जी पिता तुम्हारे लक्ष्मी जी के आँख के तारे
छोड़ सभी माया संसारी स्वामी हुए बाल ब्रह्मचारी
शाहतलाई गए चराए पौनहारी छवि दिखलाए
नित प्रति वन में गए चराते गौ विप्रन का दुख मिटाते
अहि भांति बीते कछु काला आए दत्तात्रेय कृपाला – कृपाला
आत्मज्ञान को साक्षी माना गुरुदेव आपने पहचाना
तब पर्वत गिरिनार पे आए गुरु सेवा में चित लगाए
पूरण जान गुरु अवसर पाए ऋषि, मुनि, ज्ञानी बुलवाए
सिद्ध, साधु, योगी सब आए द्वारे आकर अलख जगाए
तब लक्ष्मीपुत्र बुलाया दूधधारी नाम रखाया
सुमिरत पूरण हुई तपस्या गुरु प्रसन्न हो दीन्ही दीक्षा
बरसे पुष्प, दुंदुभी बाजे सुमिरत नाम सभी दुःख भागे
नाम तुम्हारा सब सुखदाता भक्तों के सब कष्ट मिटाता
नारद, शारद सहित अहिंसा देवन आए दीन्ही आशीषा
ऋद्धि-सिद्धि, नव निधि के दाता असवर दीन, पार्वती माता
सदा रहो शंकर के दासा पूरण कीजो सबकी आशा
शिखर महेन्द्र पर्वत आए बारह वर्ष समाधि लगाए
वहाँ पर कीन्हीं घोर तपस्या प्राणी मात्र की कीन्ही रक्षा
इन्द्र लेने परीक्षा आए मानी हार, चरणन सिर नाए
जगदम्बा नव दर्शन दीन्हा गोद बिठाए, आशीष दीन्हा
अजर अमर तुम हो जाओ सब दुखियों के कष्ट मिटाओ
सुमिरन करो जहाँ भी बेटा शिव को पाओ शक्ति समेत
आए शाहतलाइया देवा गौ विप्रन की कीन्ही सेवा
पिछले जनम की याद जो आए माँ रत्नों की गऊ चराए
गोरख लेने परीक्षा आए मानी हार भरथरी पैठाए
बारह साल सेवा थी कीन्ही रत्नों ने पहचान न कीन्ही
झूठा उलाहना दिया था जाकर बालक रूठ गए ये सुनकर
खेत दिखाए हरे-भरे सब रोटी लस्सी वहीं धरी सब
धोलगिरी पर्वत पर आए राक्षस मरे, गुफा में धाए
श्रद्धा सहित जो रोट चढ़ावे मनवांछित फल तुरत ही पावे
जो यह पढ़े बालक चालीसा होवे सिद्धि, साखी गोरिषा
सेवक हो चरणन का दासा कीजे नाथ हृदय में वासा
अंग विभूति रमाए के लियो झोली, चिमटा धार
बाबा बालक नाथ जी को मेरा कोटि-कोटि नमस्कार
🌼 Benefits of Reciting Baba Balak Nath Chalisa
Reciting Baba Balak Nath Chalisa with devotion brings numerous spiritual and life benefits. It is believed that chanting the Chalisa regularly connects devotees with Baba Ji’s divine grace.
✨ Key Benefits:
- Removes fear, stress, and negative energy
- Brings peace, protection, and divine blessings
- Helps devotees overcome obstacles in life
- Strengthens faith, devotion, and spiritual energy
- Fulfills wishes and grants prosperity
🗓️ When to Read Baba Balak Nath Chalisa
- Auspicious Days: Every Sunday and Thursday
- Best Time: Early morning after bath or evening during prayer time
📌 Conclusion
Reciting Baba Balak Nath Chalisa daily can bring protection, inner peace, and positive transformation in life. It is not just a prayer but a spiritual path that strengthens faith and devotion while connecting devotees with Baba Ji’s divine blessings.
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